एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में 12वें दो दिवसीय राज्य स्तरीय ‘वसंतोत्सव 2026: पुष्प प्रदर्शनी एवं पुष्प प्रतियोगिता’ का शानदार आगाज

admin  7 hours, 5 minutes ago Top Stories

-रोशन लाल मित्तल, संरक्षक एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत ने किया  शुभारम्भ 
-पुष्पों का उत्सव अनंत उम्मीद और नई उर्जा का प्रतीक है: रोशन लाल मित्तल
-अभिभावको और शिक्षण संस्थानों को अपने कोमल युवाओ का ध्यान मालियो की तरह रखना चाहिए: रोशन लाल मित्तल  
-रंगोली, हैण्ड प्रिंटिंग और सेल्फी विद फ्लावर्स प्रतियोगिताओं का हुआ आयोजन  

PANIPAT AAJKAL , 10 फरवरी: एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की पर्यावरण बचाओ सोसाइटी के तत्वाधान में 12वें   दो दिवसीय राज्य स्तरीय ‘वसंतोत्सव 2026: पुष्प प्रदर्शिनी एवं पुष्प प्रतियोगिता’ के भव्य आयोजन का उदघाटन मुख्यातिथि रोशन लाल मित्तल संरक्षक एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत ने किया । अनूप कुमार प्रधान एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत, नरेश कुमार गोयल सचिव, श्रवण कुमार उप-सचिव, सतीश चंद्रा चेयरमैन एसडीवीएम हुडा, विकास कुमार वाईस-चेयरमैन, सचिव तुलसी सिंगला, पवन गर्ग चेयरमैन एसडी इंटरनेशनल स्कूल, प्रमोद कुमार बंसल प्रधान एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, विनोद कुमार गुप्ता चेयरमैन एमएएसडी पब्लिक स्कूल, उमेश कुमार अग्रवाल चेयरमैन एपीट इंडिया, आकाश गर्ग एसडी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसस, अभय सिंगला वाईस-चेयरमैन एसडीवीएम सिटी, कृष्ण अग्रवाल ऑडिटर, नरेश सिंगला मेम्बर, अश्वनी गोयल, साहिल गुप्ता और डॉ. जयश्री गर्ग, प्राचार्य एसडीवीएम सिटी ने कार्यक्रम में बतौर गेस्ट ऑफ़ ऑनर शिरकत की । एसडी पीजी कॉलेज प्रबंधकारिणी के प्रधान दिनेश गोयल, उप-प्रधान राजीव गर्ग, महासचिव महेंदर अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विशाल गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने माननीय मेहमानों का स्वागत पुष्प-रोपित गमलों के साथ किया । कार्यक्रम के संयोजक की भूमिका और वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रवि रघुवंशी, जीवशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका चंदना एवं डॉ. राहुल जैन ने निभाई| जूरी का उत्तरदायित्व डॉ संगीता गुप्ता, प्रो अन्नू आहूजा, डॉ संतोष कुमारी, डॉ मोनिका खुराना और डॉ प्रियंका चांदना को दिया गया । ‘वसंतोत्सव 2026: पुष्प प्रदर्शिनी’ में हरियाणा प्रदेश के स्कूल, कॉलेज, संस्थान, नर्सरियों के माली और आमजन भाग ले रहे है । वसंतोत्सव में इच्छुक आमजन पौधे और गमले खरीद सकते है । पुष्प प्रदर्शनी में भाग लेने का कोई भी शुल्क नहीं है । ‘वसंतोत्सव 2026: पुष्प प्रदर्शिनी’ आमजन के लिए दोनों दिन प्रात: 9 बजे से सांय: 5 बजे तक खुला रहेगा । पहले दिन रंगोली, हैण्ड प्रिंटिंग और सेल्फी विद फ्लावर्स प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें कॉलेज, स्कूलों और आमजन ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया । कल इस समारोह का पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा जहाँ विजेताओं को नकद पुरस्कार, शील्ड और प्रशस्ति पत्र दिए जायेंगे ।

मुख्यतिथि रोशन लाल मित्तल ने अपने उदघाटन भाषण में कहा कि वसंत का उत्सव अनंत आशा और उर्जा का प्रतीक है । युवाओं के बारे में बोलते हुए उन्होनें कहा कि अभिभावको और शिक्षण संस्थानों को अपने कोमल युवाओ का ध्यान मालियो की तरह रखना चाहिए और इन्हें सही मार्ग दिखाकर फूलों की तरह खिलने का भरपूर मौका देना चाहिए । अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो देश के युवा कर्णधार खिलने से पहले ही मुरझा जायेंगे । फूल प्रकृति की सबसे प्यारी देन हैं । फूल बहुत ही सुंदर एवं कोमल होते हैं और इनको देखने मात्र से व्यक्ति का मन प्रसन्न हो जाता है । फूल व्यक्ति के मनोभाव पर बहुत ही गहरा प्रभाव डालते हैं । इनमे व्याप्त कोमलता का भाव हमें सबके साथ कोमलता पूर्ण व्यवहार करने की प्रेरणा देता है । हमारे जीवन में फूलों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका भावनाओं के वाहक के रूप में है । कुछ विशिष्ट भावनाएं और अर्थ विशेष प्रकार के फूलों से जुड़े होते है । प्यार, खुशी, कृतज्ञता या दुःख की अलग-अलग भावनाओं को व्यक्त करने के लिए फूल हमारी मदद करते है । फूलों में हमारी मनोदशा को बदलने और प्रभावित करने की क्षमता भी होती है । उन्होनें कहा कि आज के दौर में जब इंसान प्रकृति के गैर-जिम्मेदाराना दोहन में लगा हुआ है तो इसके भयंकर दुष्परिणाम भी हम सबके सामने है । पर्यावरण हमारे लिए एक चुनौती बन गया है । पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ाना हमारी प्राथमिकता होना चाहिए और इस तरह के आयोजन अगर हम वर्षभर अपने जीवन में अपनाए तो समाज में बदलाव निश्चित आएगा और हमारा पर्यावरण भी तंदुरस्त बनेगा । इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं में प्रेरणा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और स्नेह के भाव पैदा होते है ।

इस वर्ष पुष्प महोत्सव की थीम “प्रकृति संरक्षण : आत्मनिर्भर–विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम” निर्धारित की गई है। हमने वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। विकास बहुआयामी प्रक्रिया है, किंतु इस विकास यात्रा में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों का शोषण अथवा विनाश न हो। अन्यथा कोई भी विकास मॉडल न तो पूर्ण होगा और न ही स्थायी। 

पुष्प महोत्सव का मुख्य उद्देश्य हमारे बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को अपने निवास स्थान पर हरियाली विकसित करने तथा उसका संरक्षण करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।

एसडी एजुकेशन सोसाइटी (रजि.) पानीपत के प्रधान अनूप कुमार ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य हमारे युवाओ को फूलों के माध्यम से खुद के और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना है । 

पवन गर्ग चेयरमैन एसडी इंटरनेशनल स्कूल ने कहा कि यह आयोजन तभी सफल माना जाएगा जब हर एक युवा यह शपथ उठाएगा कि वह हर बुराई को छोड़कर अपने जीवन में फूलों की तरह महकेगा और समाज एवं देश की प्रगति के साथ-साथ धरती और पर्यावरण का भी ईमानदारी से ख्याल रखेगा । 

सतीश चंद्रा चेयरमैन एसडीवीएम हुडा ने कहा कि जहां पूरी दुनिया प्रदूषण जैसी जटिल समस्या से लड़ने के उपाय ढूंढ रही हैं वहीं हम अपनी दिनचर्या में थोड़ी सी सावधानी या बदलाव लाकर पर्यावरण को बचाने में बड़ा योगदान कर सकते हैं । इसके लिए हमें ज्यादा कुछ करने की ज़रुरत नहीं है बल्कि केवल अपने घरों में और घर से बाहर पेड़-पोधों को लगाना और बचाना भर है । 

दिनेश गोयल कॉलेज प्रधान ने कहा कि युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें सच्चा मार्ग प्रशस्त करने में फूलों का कोई मुकाबला नहीं है । उन्हें उम्मीद है कि हर युवा इस प्रदर्शनी से कुछ न कुछ सीखकर अवश्य जाएगा । वसंत का सच्चा पुजारी जीवन में कभी निराश नहीं होता है । पतझड़ में जिस प्रकार वृक्ष के पत्ते गिर जाते हैं उसी प्रकार ऐसा इंसान अपने जीवन में से निराशा और असफलताओं को झटक देता है । निराशा से घिरे हुए जीवन में वसंत आशा का संदेश लेकर आता है ।  

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने वसंतोत्सव के प्रारूप के बारे में बताते हुआ कहा कि व्यक्तिगत स्पर्धा में कुल 600 से अधिक प्रतिभागियों तथा 15 से अधिक संस्थानों ने वसंतोत्सव में अपने शौक-ए-गुल को प्रदर्शित किया तथा 1500 से ज्यादा पुष्प युक्त गमले रखे गायें हैं । वसंतोत्सव में फूलों की 60 से अधिक किस्में प्रदर्शित की गई है जिनमें पेटूनिया, गुलाब, कोरनेशन, डाईएन्थस, केक्टस, सेज, फोलीएज, जिरेनियम, एनिमोंन, रेननकुलस, डेलिया, गुलदावदी, साइकलामेन, कल्सुलेरिया, पेन्सी इत्यादि शामिल है । दुर्लभ प्रकार की प्रजातियाँ जैसे ओर्चिड्स, लिलियम, केसर, आइरिस, लिली भी आकर्षण का केंद्र है। प्रदर्शनी में अलग-अलग कटेगरी में इनाम दिये जायेंगे जिनमें नकद पुरस्कार, शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र शामिल है । मालियों को विशेष तौर पर नकद इनाम से नवाजा जाएगा। सेल्फी पॉइंट्स पर ली गई ‘सेल्फी विद फ्लावर्स’ प्रतियोगिता, हैण्ड प्रिंटिंग और रंगोली के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया जाएगा । उन्होनें कहा कि इस पुष्प-प्रदर्शनी का एक-एक फूल एक-एक युवा का प्रतीक है । जैसे हम अपने पेड़-पोधों और फूलों की चिंता करते है वैसे ही हमें अपने युवाओं की भी चिंता करनी पड़ेगी । हर युवा जब ध्यान से देखेगा तो खुद महसूस करेगा कि फूल उनसे कुछ कह रहा है, उनसे बात कर रहा है । हर फूल उन्हें यही कहता प्रतीत होगा कि बुराई और आलस्य छोड़कर एवं नेक राह पर चलकर युवा भी समाज और देश में अच्छाई एवं आदर्शता की महक फैला सकते है ।   इस अवसर पर कॉलेज के स्टाफ सदस्य प्रो प्रवीन खेरडे, डॉ मुकेश पूनिया, डॉ. इंदु बाला, डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ मोनिका खुराना, डॉ रवि कुमार, डॉ. राहुल जैन, डॉ दीपा वर्मा, डॉ प्रियंका चांदना, प्रो प्रवीण कुमारी, डॉ संतोष कुमारी, प्रो मनोज कुमार, दीपक मित्तल, आदि मौजूद रहे ।

img
img